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सावन का महीना

सावन का महीना प्रणय करे सोर, सावन का महीना प्रणय करे शोर, प्रणय करे सोर, प्रणय करे शोर, अरे बाबा शोर नहीं सोर, सोर, सोर, प्रणय करे सोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, सावन का महीना प्रणय करे सोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, सावन का महीना प्रणय करे सोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, पलभर ठहर जाए यह बिजुरिया, बइया पकडलो जब भूले हम गलिया, पलभर ठहर जाए यह बिजुरिया, बइया पकडलो जब भूले हम गलिया, बिजुरिया से भागे जाए ना उस ओर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, हो ..... सावन का महीना प्रणय करे सोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, दुनिया भला क्यों माने तुमको हमारा, होना कहाँ है मुझे दुनिया का प्यारा, दुनिया भला क्यों माने तुमको हमारा, होना कहाँ है मुझे दुनिया का प्यारा, ज़िन्दगी को हमारी ले चलो प्रीतचोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, हो ..... सावन का महीना प्रणय करे सोर, मनडा रे झूले ऐसे जैसे नशा हो चहुओर, हमतो क़लम बैरी चले हैं लिखेलवा, गाये हो जैसे मन में प्यारी सी ग़ज़लवा, हमतो क़लम बैरी चले हैं लिखेलवा, गाये हो जैसे मन में प्यारी सी ग़ज़लवा, न्यारी मतवाली अदाएं चितचो...

पार्थिव शिव पूजन

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पार्थिव शिव पूजन  नाद और विन्दुसे ३८ युक्त ओंकारके उच्चारणको विद्वान् पुरुष समानप्रणव कहते हैं। यदि प्रतिदिन आदरपूर्वक दस हजार पंचाक्षर मन्त्रका जप किया जाय अथवा दोनों सन्ध्याओंके समय एक-एक हजारका ही जप किया जाय तो उसे शिवपदकी प्राप्ति करानेवाला समझना चाहिये  विश्वेश्वर संहिता॥ ३६-३९ ॥ ३९ ब्राह्मणोंके लिये आदिमें प्रणवसे युक्त पंचाक्षरमन्त्र अच्छा बताया गया है। फलकी प्राप्तिके लिये दीक्षापूर्वक गुरुसे मन्त्र ग्रहण करना चाहिये। कलशसे किया हुआ स्नान, मन्त्रकी दीक्षा, ९ मातृकाओंका न्यास, सत्यसे पवित्र अन्तःकरणवाला ब्राह्मण तथा ज्ञानी गुरु-इन सबको उत्तम माना गया है ।। ४०-४१ ॥ द्विजोंके लिये 'नमः शिवाय' के उच्चारणका विधान है। द्विजेतरोंके लिये अन्तमें नमः -पदके प्रयोगकी विधि है अर्थात् वे 'शिवाय नमः' इस मन्त्रका उच्चारण करें। स्त्रियोंके लिये भी कहीं-कहीं विधिपूर्वक अन्तमें नमः जोड़कर उच्चारणका ही विधान अर्थात् कोई-कोई ऋषि ब्राह्मणकी स्त्रियोंके लिये नमः पूर्वक शिवायके जपकी अनुमति देते हैं अर्थात् वे 'नमः शिवाय' का जप करें। पंचाक्षर मन्त्रका पाँच करोड़ जप करके मनुष्य...

#श्रावण मास प्रथम दिन।

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*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞* 🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉  *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*   🌐 *आज का पंचांग* 🌐  ⛳ *तिथि*....१ (प्रतिपदा) 🙏 यज्ञनारायण इष्टि 🙏 🍀 श्रावणमास - शिवपूजनारंभ 🍀 🍁 जीवन्तिका पूजन 🍁 💐 महालक्ष्मी स्थापन - पूजन 💐 🕉️ नक्त व्रतारम्भ 🕉️ 2️⃣9️⃣-0️⃣7️⃣-2⃣0⃣2⃣2️⃣ 🔔 *वार*.....शुक्रवार 🦚 *नक्षत्र*....पुष्य 🪔 *योग*.....सिद्धि 🍁 *करण*.....किंस्तुघ्न 🌅 *सूर्योदय* :- ६:१० 🌌 *सूर्यास्त* :- ७:२२ 🌓 *पक्ष*........शुक्ल 🌝 *चन्द्र राशि*.....कर्क ☂️ *ऋतु*.........वर्षा 💮 *मास*..... *श्रावण* 🌍 *कलियुगाब्द*......५१२४ 🌎 *विक्रम संवत्*.....२०७८ 🌏 *शक संवत्*...... १९४४ 🌹 *अभिजीत मुहूर्त*.....१२:१७ से १३:११ 🌚 *राहुकाल*....११:०४ से १२:४४ तक ( शुभ कार्य वर्जित ) 🌻 *।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 🌻         🙏 ● *जय श्री कृष्ण* ● 🙏

नागपंचमी विशेष स्त्रोत्र एवं अरिष्ट शांति के उपाय

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नागपंचमी विशेष स्त्रोत्र एवं अरिष्ट शांति के उपाय 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 ।।श्री सर्प सूक्तम।। ब्रह्मलोकेषु ये सर्पा शेषनाग परोगमा:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।1।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासु‍कि प्रमुखाद्य:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।2।। कद्रवेयश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।3।। इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।4।। सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।5।। मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखाद्य। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।6।। पृथिव्यां चैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।7।। सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।8।। ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पप्रचरन्ति। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।9।। समुद्रतीरे ये सर्पाये सर्पा जंलवासिन:। नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।10।। रसातलेषु ये स...

ગુરુવાર વિષે.

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આવતીકાલે ગુરુપુષ્ય અમૃત સિદ્ધિ યોગ અને અમાસ નો સમન્વય છે  સાધના , શ્રી , પુત્ર પૌત્રાદિક કાર્યો માટે ખૂબ લાભ પ્રદ આવતીકાલે શ્રી બિલ્વ વૃક્ષ નીચે સાધના અનંત ફળદાયી બને છે. શ્રી ગણેશ સ્તોત્ર , કુળદેવી મંત્ર , શ્રી વિષ્ણુ સહસ્ત્રનામ શ્રી સૂક્ત અનંત ફળદાયી. જન્મ આખા નું દારિદ્રય દૂર થાય છે. આવતીકાલે બિલ્વ વૃક્ષ , પીપળો , વડ નું રોપણ કરવું

બીલી પત્ર વિશે માહિતી.

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૧ ) બીલી નું ઝાડ મહાદેવ સ્વરૂપ છે  ૨) બિલી ની સેવા કરવાથી શ્રી લક્ષ્મી ની પ્રાપ્તિ થાય છે ૩)બિલી નો  કાંટો વાગવા થી મુત્યુ ની પીડા હરાય છે ૪)બિલી ની પ્રદક્ષિણા કરવાથી અડસઠ તીર્થોમાં પ્રદક્ષિણા કરવાનું પુણ્ય મળે છે  ૫) નાના મોટા જીવ જંતુ જાણે અજાણે મારિયા હોય તો બિલી ની પ્રદક્ષિણા થી જ એ પાપ ધોવાય છે  ૬) બિલી ના ઝાડ નીચે શિવપુરાણ વચવાથી અક્ષય પુણ્ય મળે છે  ૭)બિલી ના ઝાડ ને પાણી  પીવડાવવા થી શિવ જી ના અભિષેક જેટલું જ પુણ્ય મળે છે  ૮)બિલી ના ઝાડ નીચે દીવો કરવાથી તત્વજ્ઞાન  મળે છે આધ્યાત્મિક તત્વજ્ઞાન , મુડતત્વ ની પાપ્તી થાય છે  ૯) આ મુત્યુ લોક માં જેના ઘરે બિલી છે એને જ પવિત્ર માનવામાં આવી યા છે તેના ઘરે અડસઠ તીર્થો બિરાજમાન છે।  ૧૦) બિલી ના ઝાડ નીચે પ્રાથીવ શિવલિંગ/માટી નું શિવલિંગ બનવાનો ખુબ મહિમા છે  ૧૧)બિલી ના ઝાડ ની નીચે જે ઓમ નમઃ શિવાય મહા મંત્ર ની માળા કરે છે તો જેટલા બિલી ના પાન છે તેટલા પાન મહાદેવ ને ચડાયા હોય એટલું પુણ્ય મળે છે ૧૨)કોઈ પણ માળા ને સિદ્ધ કરવી હોય તો બિલી ના ઝાડ નીચે  જાપ કરવો જ જોઈએ  શિવાલય...

समयसूचक AM और PM का उद्गम

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समयसूचक AM और PM का उद्गम भारत ही था। पर हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है : AM : एंटी मेरिडियन (ante meridian) PM : पोस्ट मेरिडियन (post meridian) एंटी यानि पहले, लेकिन किसके?  पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके? यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था। अध्ययन करने से ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को अपनी आंधियों में उड़ा दिया और अब, सब कुछ साफ-साफ दृष्टिगत है। कैसे?  देखिये... AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya ---------------------------- सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसीको गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस 'मतलब' को नहीं इंगित करते जो कि वास्तव में है। आरोहणम् मार्तण्डस्य Arohanam Martandasaya यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)। पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasaya यानि सूर्य का ढलाव। दिन के बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)। बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढल...