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घर में कुत्ता पालने के विषय में।।

*‼️घर मे कुत्ता पालने के विषयमे....‼️* आवारा कुत्ते को भोजन देने का फल शास्त्रों ने बहुत ही अधिक बताया और साथ ही पालतू कुत्तों के पालन से भी बारह वर्षों तक सब प्रकार के एश्वर्य-प्रगति देखने को मिलता है पर बारहवें वर्ष के पश्चात घर में कलह-अशांति, केश-मुकदमा तथा बीसवें वर्ष 'सर्वस्व' से भी हाथ धोना पड़ सकता है इसलिए घर में कुत्ता पालन न करें।             मेरा यह लेख शास्त्रमत से चलनेवाले धर्मावलंबियों के लिए है आधुनिक विचारधारा के लोग इससे सहमत या असहमत होने के लिए बाध्य नहीं है।  महाभारत में महाप्रस्थानिक पर्व का अंतिम अध्याय ,इंद्र ,धर्मराज और युधिष्ठिर संवाद में इस बात का उल्लेख है। जब युधिष्टिर ने पूछा कि यह कुत्ता मेरे साथ यहां तक चलकर आया तो मै इस कुत्ते को अपने साथ स्वर्ग क्यों नहीं ले जा सकता?            तब इंद्र ने कहा- "हे राजन कुत्ता पालने वाले के लिए स्वर्ग में स्थान नहीं है ऐसे व्यक्तियों का स्वर्ग में प्रवेश वर्जित है।         कुत्ते से पालित घर मे किये गए यज्ञ, और पुण्य कर्म के फल को क्रोध...

सनातन धर्म एवम् ब्राह्मण उत्पत्ति ।। शास्त्री जी ।।

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शास्त्री जी भावनगर  *सनातन धर्म एवं ब्राह्मणोत्पत्ति* =================== ⭕ सनातन धर्म के अनुसार सृष्टि के पूर्व सदाशिव ही भगवान् विष्णु के रूप में प्रकट हुए। ⭕ भगवान् विष्णु के कमलनाभि से भगवान् ब्रह्मा प्रकट हुये। ⭕ सृष्टि निर्माण हेतु भगवान् ब्रह्मा ने अपने *दशांश शक्ति* से 10 ऋषियों को 10 अलग-अलग अंगों से प्रकट किया..... 1-गोद से नारद, 2-अंगूठे से दक्ष, 3-श्वास से वसिष्ठ,  4-त्वचा से भृगु, 5-हाथ से क्रतु, 6-नाभि से पुलह, 7-कानों से पुलस्त्य, 8-मुख से अंगिरा, 9-नेत्रों से अत्रि, और 10-मन से मरीचि उत्पन्न हुये। 👉 ये सभी ऋषि भगवान् ब्रह्मा के दशांश शक्ति के हैं। ये सभी ऋषि त्रिगुण सत्-रज-तम से निर्मित थे। ये स्वर्ग से यहाँ आकर ऋषियों द्वारा ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र के रूप में स्थापित किये गये। *इस समय तक लिखने की परम्परा नहीं थी।* इस काल में ब्राह्मण *पढ़ना-पढ़ाना, यज्ञकरना-यज्ञकराना तथा दानदेना-दानलेना* का कार्य *श्रुति-स्मृति* से किया करते थे। ⭕ इसके बाद भगवान् ब्रह्मा ने सत् निर्मित प्रजा के विस्तार हेतु 4 सनकादि (सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार) को उत्पन्न किय...