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South Sea Pearl

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South Sea Pearl  मोती  रत्न जन्मपत्री ग्रह अनुसार लाभ हानि         सादगी, पवित्रता और कोमलता की निशानी माने जाने वाला मोती एक चमत्कारी ज्योतिषीय रत्न माना जाता है। इसे मुक्ता, शीशा रत्न और पर्ल (Pearl) के नाम से भी जाना जाता है। मोती सिर्फ एक रंग का ही नहीं होता बल्कि यह कई अन्य रंगों जैसे गुलाबी, लाल, हल्के पीले रंग का भी पाया जाता है। मोती, समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाए जाते  मोती के तथ्य (Facts of Moti or Pearl in Hindi) * मोती के बारे में बताया जाता है कि यह रत्न, बाकी रत्नों से कम समय तक ही चलता है क्योंकि यह रत्न रूखेपन, नमी तथा एसिड से अधिक प्रभावित हो जाता है। * प्राचीनकाल में मोती (Pearl or Moti) को सुंदरता निखारने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था तथा इसे शुद्धता का प्रतीक माना जाता था। मोती के लिए राशि (Moti for Cancer Rashi)कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना अत्याधिक लाभकारी माना जाता है । चन्द्रमा से जनित बीमारियों और पीड़ा की शांति के लिए मोती धारण करना लाभदायक माना जाता है। मोती के फायदे (Benefits of P...

what is bhadra

What's is bhadra (vishti) Bhadra is considered bad for most auspicious activities hence it is excluded more god mugurut timing. મોટાભાગના શુભ કાર્યો માટે ભદ્રાને અશુભ માનવામાં આવે છે તેથી તે વધુ સારા મુહૂર્ત સમયને બાકાત રાખવામાં આવે છે. अशुभ माना जाता है? * जानिए भद्रा की शुभता एवं अशुभता एवं महत्व    किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। इसलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है भद्रा? और क्यों इसे अशुभ माना जाता है?   पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और राजा शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया किंतु भद्रा काल में तंत्र कार्य, अदालती और राजनीतिक चुनाव का...

history of Maharana pratap singh

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"महाराणा प्रताप के आदर्श थे उनके पितामह राणा सांगा" प्रताप को बाल्यकाल में सदा यही बात खटकती रहती थी कि भारतभूमि विदेशियों की दासता की हथकड़ी और बेड़ी में सिसक रही है । वे स्वदेश की मुक्ति-योजना में सदा चिन्तनशील रहते थे ।  प्रताप बड़े साहसी बालक थे। स्वतन्त्रता और वीरता के भाव उनके रग-रग में भरे हुए थे। कभी-कभी बालक प्रताप घोड़े की पीठ से उतरकर बड़ी श्रद्धा और आदर से महाराणा कुम्भा के विजयस्तम्भ की परिक्रमा कर तथा मेवाड़ की पवित्र धूलि मस्तक पर लगाकर कहा करते थे कि "मैंने वीर क्षत्राणी का दुग्ध पान किया है, मेरे रक्त में महाराणा साँगा का ओज प्रवाहित है। हे चित्तौड़ के विजय स्तम्भ ! मैं तुमसे स्वतन्त्रता और मातृ-भूमि-भक्ति की शपथ लेकर कहता हूँ, विश्वास दिलाता हूँ कि तुम सदा उन्नत और सिसौदिया-गौरवके विजय प्रतीक बने रहोगे। शत्रु तुम्हें अपने स्पर्शसे मेरे रहते अपवित्र नहीं कर सकते।" बालक प्रतापके सामने सदा राणा साँगाका आदर्श रहता था । वे प्रायः श्रद्धाञ्जलि समर्पित करते समय कहा करते थे कि 'मैं महाराणा साँगाके अधूरे कार्यको अवश्य पूरा करूंगा । उनके दिल्ली- विजय स्व...

पा शांकुशा एकादशी।। ekadashi

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બ્રહ્માંડ પુરાણમાં યુધિષ્ઠિરને શ્રીકૃષ્ણે પાસાંકુશા એકાદશીનું માહાત્મ્ય કહ્યું છે, જે આ વ્રત કરે છે તે આવા ફળ મેળવે છે. “પાસાંકુશા એકાદશી” પાસાંકુશા / પાશાંકુશા અથવા પાપાંકુશા એકાદશી આસો માસમાં શુકલ પક્ષમાં આવે છે. તેનું માહાભ્ય બ્રહ્મ વૈવર્ત પુરાણમાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ અને મહારાજ યુધિષ્ઠિર વચ્ચેની વાતચીતમાં વર્ણવાયું છે. આ વર્ષે આ એકાદશી 6 ઓક્ટોબર 2022 ના રોજ છે. યુધિષ્ઠિરે શ્રીકૃષ્ણને પૂછયું, ‘હે મધુસુદન, આસો માસના શુકલ પક્ષમાં આવતી એકાદશીનું નામ, મહત્ત્વ, વિધિ અને ફળ વિશે મને કહો.’ ભગવાન શ્રીકૃષ્ણે કહ્યું, ‘હે રાજન, આ એકાદશીનું નામ પાસાંકુશા અથવા પાપાંકુશા એકાદશી છે. આ એકાદશીનું માહાભ્ય સાંભળવાથી બધા પાપ નાશ પામે છે. આ એકાદશીએ દરેકે પદ્મનાથની પૂજા કરવી જોઈએ. આ એકાદશી મોક્ષ આપે છે, સ્વર્ગનું તમામ સુખ અને ઈચ્છિત ફળનું પ્રદાન કરે છે. વિષ્ણુનું સંકીર્તન કરવા માત્રથી જ પૃથ્વી પરના બધા પવિત્ર સ્થળોની યાત્રા કરવાથી જે પુણ્ય મળે તેટલું પુણ્ય મળે છે. પાપાચારી પ્રવૃત્તિઓ કરવા છતાં પણ જો માનવી વિષ્ણુ ભગવાનના શરણે જાય તો પાપમાંથી છુટકારો મળે છે. જે વૈષ્ણવો ભગવાન શિવની નિંદા...

सप्तमम कालरात्रि।

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पंचम स्कंद माता।। ध्यान मंत्र स्तोत्र महिमा।। शास्त्री जी भावनगर।।

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शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे । सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥४॥ शरणागतों, दिनों एवं पीड़ितों की रक्षा में संलग्न रहनेवाली तथा सबकी पीड़ा दूर करनेवाली नारायणी देवी ! आपको नमस्कार है ।🙏🙏।। Instagram account ।। follow

jay ambe। कुष्मांडा माता चतुर्थ दिन।।

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*🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞* 🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉  *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*   🌐 *आज का पंचांग* 🌐  ⛳ *तिथि*....४ (चतुर्थी) 🌺 विनायक चतुर्थी 🌺 🍁 बिछुड़ा - रात्रि ११ः२५ से 🍁2️⃣9️⃣-0️⃣9️⃣-2⃣0⃣2⃣2️⃣ 🔔 *वार*.....गुरुवार 🦚 *नक्षत्र*....विशाखा 🪔 *योग*.....विष्कुम्भ 🍁 *करण*.....वणिज 🌅 *सूर्योदय* :- ६:३१ 🌌 *सूर्यास्त* :- ६:२८ 🌓 *पक्ष*........शुक्ल 🌝 *चन्द्र राशि*.....तुला/ रात्रि ११ः२५ से वृश्चिक 🌝 ⛱️ *ऋतु*.........शरद 🪷 *मास*..... *आश्विन* 🌍 *कलियुगाब्द*......५१२४ 🌎 *विक्रम संवत्*.....२०७८ 🌏 *शक संवत्*...... १९४४ 🌹 *अभिजीत मुहूर्त*....१२:०४ से १२:५२ 🌚 *राहुकाल*....०१:५८ से ०३:२८ तक ( शुभ कार्य वर्जित ) 🌻 *।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 🌻         🙏 ● *जय श्री कृष्ण* ● 🙏 ||ॐ || सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् । विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम् ॥ विश्वतः परमान्नित्यं विश्वं नारायणं हरिम् । विश्वं एव इदं पुरुषः तद्विश्वं उपजीवति ॥ पतिं विश्वस्य आत्मा ईश्वरं शाश्वतं शिवमच्युतम् । नारायणं महाज्ञेयं ...