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स्वस्तिक ----------- स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो।  स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्तिदः स्वस्तिकृत्स्वस्ति स्वस्तिभुक् स्वस्तिदक्षिणः।।        –महाभारत , 13/254/111 स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। 'सु' का अर्थ अच्छा, 'अस' का अर्थ 'सत्ता' या 'अस्तित्व' और 'क' का अर्थ 'कर्त्ता' या करने वाले से है। इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द का अर्थ हुआ – 'अच्छा' या 'मंगल' करने वाला। 'अमरकोश' में भी 'स्वस्तिक' का अर्थ आशीर्वाद, मंगल या पुण्यकार्य करना लिखा है। अमरकोश के शब्द हैं – 'स्वस्तिक, सर्वतोऋद्ध' अर्थात् 'सभी दिशाओं में सबका कल्याण हो।' इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द में किसी व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व के कल्याण या 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना निहित है।  'स्वस्तिक' शब्द की निरुक्ति है – 'स्वस्तिक क्षेम कायति, इति स्वस्तिकः' अर्थात् 'कुशलक्षेम या कल्याण का प्रतीक ही स्वस्तिक है। ऐसा माना जाता ह...

પારા યણ વિશે..|| શ્રી કૃષ્ણ શરણં મમ

🍁🍂💗🌷🌷પારાયણકરવાથી શું થશે ?🌷🌷💗🍂🍁 🌹પારાયણ શબ્દથી દરેક રંગ ભક્ત સારી રીતે જાણકાર છે. ખાસ કરીને દત્ત જયંતિ, રંગ જયંતિ, સ્વામી સમર્થ પ્રગટદિવસ, ગજાનન મહારાજ વગેરેમાં ખાસ પારાયણનું આયોજન થાય છે. 🌷તો આવો આપણે જોઈએ:- ૧. પારાયણ એટલે શું છે ? ૨. તે શામાટે કરવુ ? ૩. તેનાથી શું મળશે ? ૪. સત્પુરુષ ના ( રંગ લીલામૃત, ગુરૂલીલામૃત, શ્રી પાદ વલ્લભ ચરિત્ર, વગેરે) ચરિત્ર, લીલા વગેરે નું જ શાં માટે? 🌷પારાયણ એટલે પરાયણ થવું ૧. પારાયણ સાત દિવસનું હોય છે. એક નિશ્ચિત સમય નક્કી કરી ( સાતે દિવસ )  આજે સવારે ૭ વાગે તો બીજા દિવસે પણ તેજ સમયે શરૂઆત કરવી. ૨. પછી આવે છે એકટાણું કરવું અને એક જ ધાન્ય લેવું. આજે વાંચન પછી ઉપવાસ છોડતા જો મગની દાળ અને રોટલી લીધા હોય તો સાતે દિવસ એ જ પદાર્થ લેવા. ( હવિષ્યાન લેવું, તામસી પદાર્થો નો ત્યાગ કરવો). ૩. આ સાથે પગમાં ચમ્પલ  ન પહેરવા. સાત દિવસ મન, વચન અને કર્મ થી બ્રહ્મચર્ય નું પાલન કરવું.   ૪.  સાદી ચટાઈ, કામળો, કે શેતરંજી પર સૂવું. ૫. જુટ્ઠુ ના બોલવું, સંપૂર્ણ ધ્યાન ફક્ત ઈશ્વર માં રાખવું. ૬. કોઈના પાથરણા પર, પલંગ પર ન બેસવું, વગેરે.  🌷આ...

।। दस दिकपाल के बारे मैं ।। शास्त्री जी ।।

*दस दिशाओं के 10 दिग्पाल, जानिए कौन हैं* शास्त्रानुसार हमारे वायुमंडल में दिशाएं 10 होती हैं जिनके नाम और क्रम इस प्रकार हैं- उर्ध्व, ईशान, पूर्व, आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर और अधो। एक मध्य दिशा भी होती है। इस तरह कुल मिलाकर 11 दिशाएं हुईं। प्रत्येक दिशा का एक देवता नियुक्त किया गया है जिसे 'दिग्पाल' कहा गया है अर्थात दिशाओं के पालनहार। दिशाओं की रक्षा करने वाले। 10 दिशा के 10 दिग्पाल  〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ 👉 उर्ध्व के ब्रह्मा,  👉 ईशान के शिव व ईश,  👉 पूर्व के इंद्र,  👉 आग्नेय के अग्नि या वह्रि,  👉 दक्षिण के यम,  👉 नैऋत्य के नऋति,  👉 पश्चिम के वरुण,  👉 वायव्य के वायु और मारुत,  👉 उत्तर के कुबेर और  👉 अधो के अनंत। 1.उर्ध्व दिशा👉 उर्ध्व दिशा के देवता ब्रह्मा हैं। इस दिशा का सबसे ज्यादा महत्व है। आकाश ही ईश्वर है। जो व्यक्ति उर्ध्व मुख होकर प्रार्थना करते हैं उनकी प्रार्थना में असर होता है। वेदानुसार मांगना है तो ब्रह्म और ब्रह्मांड से मांगें, किसी और से नहीं। उससे मांगने से सब कुछ मिलता है। वास्तु👉  घर की छत,...

એકાદશી || વ્રત |કામિકા એકાદશી.

*आषाढ़ कृष्ण एकादशी* - ब्रह्मवैवर्त पुराण अंर्तगत अथाषाढ कृष्ण एकादशी-युधिष्ठिरजी बोले कि महाराज ! ज्येष्ठ शुक्ला निर्जला एकादशीका माहात्म्य श्रवण किया, अब आप आषाढकृष्ण एकादशीका क्या नाम होता है ? ॥१॥ हे मधुसूदन ! यह आप प्रसन्न होकर मुझको वर्णन कीजिये । श्रीकृष्णजी बोले कि, हे राजन् ! ब्रतोंमें उत्तम व्रतका वर्णन तुम्हारे सम्मुख कहता हूं ॥२॥ सब पापोंको नाश करनेवाली मुक्ति और भुक्तिको देनेवाली आषाढके कृष्णपक्षमें 'योगिनी' नामकी एकादशी होती है ॥३॥ हे राजश्रेष्ठ ! यह एकादशी संसाररूपी समुद्रमें डूबनेवालोंको जहाजके समान और पापोंका नाश करनेवाली एवं सनातनी है ॥४॥ हे नराधिप ! तीनों जगतको सार रूपा प्राचीन एवं पापहारिणी, इस योगिनी एकादशी कथाका मैं तुम्हें वर्णन करताहूं ॥५॥ शिवपूजा करनेवाले अलका नगरीके स्वामी कुबेरके पास हेममाली नामका एक मालीका लडका था ॥६॥ उसकी विशालाक्षी नामकी सुन्दर स्त्री थी। वह कामदेवके वशीभूत होकर उसमें बडा स्नेह रखता था॥७॥नवह एकदिन मानस सरोवरसे पुष्प लाकर अपनी पत्नीके प्रेमसे फंसकर घरपर ही रहगया और अपने स्वामी कुबेरके स्थानपर न गया ॥८॥ हे राजन् ! कुबेर उस समय देवालयम...

वास्तु टिप्स ।। शास्त्री जी भावनगर ।।

Shashtriji bhavnagar Vastu upay आप अपने घर के वास्तु दोषों को दूर कर के अपने यहाँ मंगलमय वातावरण कर सकते हैं।। 1) घर में अखंड रूप से 9 बार श्री रामचरितमानस का पाठ करने से वास्तुदोष का निवारण होता है 2) हाटकेश्वर-क्षेत्र में वास्तुपद नामक तीर्थ के दर्शन मात्र से ही वास्तुजनित दोषों का निवारण होता है 3) मुख्य द्धार के उपर सिंदूर से नो अंगुल लंबा नो अंगुल चोडा स्वास्तिक का चिन्ह बनाये और जहाँ-२ भी वास्तु दोष है वहाँ इस चिन्ह का निर्माण करें वास्तुदोष का निवारण हो जाता है 4) रसोई घर गलत स्थान पर हो तो अग्निकोण में एक बल्ब लगा दें और सुबह-शाम अनिवार्य रूप से जलाये। ६ द्धार दोष और वेध दोष दूर करने के लिए शंख, सीप, समुद्र झाग, कौड़ी लाल कपड़े में या मोली में बांधकर दरवाजे पर लटकायें। 5) बीम के दोष को शांत करने के लिए बीम को सीलिंग टायल्स से ढंक दें। बीम के दोनों ओर बांस की बांसुरी लगायें। 6) घर के दरवाजे पर घोड़े की नाल (लोहे की) लगायें। यह अपने आप गिरी होनी चाहिए 7) घर के सभी प्रकार के वास्तु दोष दूर करने के लिए मुख्य द्धार पर एक ओर केले का वृक्ष दूसरी ओर तुलसी का पौधा गमले में लगायें। 8) दुकान...

|| રુદ્ર અષ્ટક સ્તોત્ર || હર મહાદેવ ||

रुद्राष्टकम       *नमामीशमीशान निर्वाणरूपं*       *विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम*       *निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं*       *चिदाकाशमाकाशवासं भजेहम* हे भगवन ईशान को मेरा प्रणाम ऐसे भगवान जो कि निर्वाण रूप हैं जो कि महान ॐ के दाता हैं जो सम्पूर्ण ब्रह्माण में व्यापत हैं जो अपने आपको धारण किये हुए हैं जिनके सामने गुण अवगुण का कोई महत्व नहीं, जिनका कोई विकल्प नहीं, जो निष्पक्ष हैं जिनका आकर आकाश के सामान हैं जिसे मापा नहीं जा सकता उनकी मैं उपासना करता हूँ |       *निराकारमोङ्करमूल* *तुरीयं*       *गिराज्ञानगोतीतमीशं* *गिरीशम्* ।       *करालं महाकालकालं कृपालं*      *गुणागारसंसारपारं* *नतोहम* जिनका कोई आकार नहीं, जो ॐ के मूल हैं, जिनका कोई राज्य नहीं, जो गिरी के वासी हैं, जो कि सभी ज्ञान, शब्द से परे हैं, जो कि कैलाश के स्वामी हैं, जिनका रूप भयावह हैं, जो कि काल के स्वामी हैं, जो उदार एवम् दयालु हैं, जो गुणों का खजाना हैं, जो पुरे संसार के परे हैं उनके सामने मैं...

બિલિપત્ર વિશે અનોખી માહિતી જાણો.

પૂજા અર્ચનામાં ઉપયોગ લેવાતા બીલીપત્રનો ભગવાનને અર્પણ બાદ યોગ્ય ઉપયોગ કરવા બાબતે । Xovak Pharma વડોદરા ના સ્થાપક Raj Dangar જણાવે છે કે,  દેશભરમાં  શ્રાવણ માસની ખુબ જ ધામધૂમથી ઉજવણી કરવામાં આવે છે। લોકો શ્રાવણ માસ પર ભગવાન ભોલેનાથના મંદિરમાં ભક્તો ભગવાનને રીઝવવા માટે દુધ, શેરડીનો રસ અને બિલીપત્ર ચઢાવે છે। આ મહિનામાં ભક્તો કરોડો બિલીપત્ર  ભગવાન ભોલેનાથને અર્પણ કરે છે પણ કોઈ દિવસ બિલીપત્ર ભગવાનને અર્પણ કર્યા પછી એનો કોઈ જ ઉપયોગ કરવામાં આવતો નથી અને અતિ મૂલ્યવાન એવા બિલીપત્ર ઘણા જ વેસ્ટ થાય છે અને આપણે જાણતા નથી પણ આ બિલીપત્રો ઘણી  રીતે ઉપયોગ કરવામાં આવે છે।, ભગવાન ને અર્પણ બાદ ભગવાનને ધરાવેલ બિલીપત્રને પ્રસાદ સમજીને રોજિંદા જીવનમાં સેવન કરવામાં આવે તો વાત પિત્ત અને કફ પણ દૂર થાય છે। અલબત તે ચર્મ રોગ અને ડાયાબીટીસમાં રક્ષા આપે છે અને બ્લડ પ્રેસરમાં ખૂબ જ ઉપયોગી નીવડે છે. આયુર્વેદ પ્રમાણે બીલીપત્ર સ્વાદમાં મધુર, તૂરી, કડવી અને તીખી, ગરમ, ભૂખ લગાડનાર, પાચનકર્તા, રુચિકર અને ગ્રાહી-ઝાડો બાંધનાર છે.બિલીનાં કુમળાં ફળ સ્વાદમાં કડવાં અને તૂરાં, ગરમ, દીપન, પાચન, પચવામાં ભારે તથા ...