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Makar sankranti mahtva

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હર મહાદેવ 🌸 ભીષ્મ પિતામહે કરેલી ભગવાનની સ્તુતિ : ભીષ્મ સ્તુતિ 🌸 ભીષ્મ પિતામહ કહે છે કે તમારા સ્વરુપ જેવું ત્રિભુવનમાં કોઇ સ્વરુપ નથી. આ ભુવન સુંદર છે, તમામ વર્ણ છે, પિતાંબરો ધારણ કરેલા છે ✨ મૃત્યુને જેવી રીતે ભીષ્મ પિતામહે મંગલ બનાવ્યું એવી રીતે આપણે સમગ્ર જીવન અને મૃત્યુની અંતિમ ક્ષણોને મંગળમય બનાવીએ 📖 શ્રીમદ્ ભાગવતના પ્રથમ સ્કંધમાં ત્રણ સ્તુતિઓ મુખ્ય છે. જેમાં ઉત્તરાજીની, કુંતાજીની અને પ્રથમ સ્કંધના નવમાં અધ્યાયમાં ભીષ્મ પિતામહે કરેલી ભગવાનની સ્તુતિ. ભીષ્મ પિતામહે સંક્લ્પ કર્યો કે ઉત્તરાયણના પરમ પવિત્ર દિવસે હું મારા દેહનો ત્યાગ કરીશ. એમને વિદાય આપવા માટે અનેક ઋષિઓ આવ્યા. મૃૃત્યુ સમયે ભીષ્મ પિતામહે ધર્મરાજ યુધિષ્ઠિરને રાજધર્મ - સ્ત્રીધર્મ એવા અનેક ધર્મોનું નિરુપણ કર્યું. ભીષ્મ પિતામહે ૧૧ શ્લોકોમાં ભગવાનની સ્તુતિ કરી, પાંચ જ્ઞાાનેન્દ્રિય, પાંચ કર્મેન્દ્રિય અને ૧૧મું મન એ દ્વારીકાધીશના ચરણોમાં સમર્પિત કર્યું. 🕉️ ભીષ્મ સ્તુતિનો પ્રારંભ 'ઇતિ' શબ્દથી થાય છે. આમ કોઇપણ સ્તુતિ કે સ્ત્રોત જુઓ તો તેેનો આરંભ 'અથ' શબ્દથી છે અને સમાપ્તિમાં 'ઇતિ' આવે. પણ ભીષ્મ સ્તુતિની ...

काशी महिमा

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હર મહાદેવ काशीविश्वनाथ  #काशी_में_निवास_करने_के_नियम काशी (वाराणसी) में निवास करने वाले साधक अथवा गृहस्थ के लिए शास्त्रसम्मत नियम क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत हैं। ये नियम स्कन्दपुराण (काशीखण्ड), धर्मशास्त्र और परंपरागत आचार से निःसृत हैं— 1. #काशी_निवास_का_संकल्प (आवश्यक) काशी में रहने से पूर्व यह भाव दृढ़ हो— मैं काशी को भोगभूमि नहीं, साधना-भूमि मानकर निवास कर रहा/रही हूँ। #नियम--  काशी में निवास को पर्यटन न बनाएं। “यह मेरा नगर नहीं, मैं इस नगर का हूँ”— यह भाव रखें। 2. #प्रातःकालीन_नियम-- गंगा काशी की जीवन-रेखा हैं। #नियम- ब्रह्ममुहूर्त में उठना अत्यंत वांछनीय है। गंगा-दर्शन या गंगा-स्मरण अवश्य करें। स्नान के बाद मौन या जप कम से कम 108 बार अवश्य करें। #शास्त्रीय_भाव--  गङ्गादर्शनमात्रेण पापक्षयो भवेत् 3. #काशी_विश्वनाथ_स्मरण-- काशी विश्वनाथ काशी के हृदय हैं। #नियम-  प्रतिदिन कम से कम मानसिक दर्शन। सोमवार या प्रदोष में विशेष स्मरण। अहंकार, प्रदर्शन और दिखावे से दूर रहना। यह माना जाता है कि काशी में निवास करना मतलब समझना चाहिए कि नित्यनिरंतर शिव का सान्निध्य मिल रहा है।...

हनुमान तांडव | sbstotram ।

હર મહાદેવ જય શ્રી કૃષ્ણ  जय श्री हनुमान  *श्री हनुमत तांडव स्तोत्र* 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *हनुमत तांडव स्तोत्र का नित्य पाठ अत्यंत लाभकारी है । इसके प्रतिदिन पाठ से श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है साथ ही मंगल, राहु आदि ग्रहों के कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। इसके नित्यपाठ करने से भूत प्रेत, रोग , दुर्घटना आदि का भय नहीं भी नहीं रहता और सर्वत्र सुरक्षा होती है।* *॥ श्रीहनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् ॥* *वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् । रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम्॥* *भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं, दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् ।* *सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं, समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥ १॥* *सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितं वचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ।* *इति प्लवङ्गनाथभाषितं निशम्य वानराऽधिनाथ आप शं तदा, स रामदूत आश्रयः ॥ २॥* *सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना, भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।* *कृतौ हि कोसलाधिपौ, कपीशराजसन्निधौ, विदहजेशलक्ष्मणौ, स मे शिवं करोत्वरम् ॥ ३॥* *सुशब्दशास्त्रपारगं, विलोक्य रामचन्द्रमा...

भगवान विष्णु के तीन नाम, करते हैं रोगों का नाश!*

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હર મહાદેવ *भगवान विष्णु के तीन नाम, करते हैं रोगों का नाश!* सभी रसायन हम करी नहीं नाम सम कोय। रंचक घट मैं संचरै, सब तन कंचन होय।। सारा संसार आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक रोगों से ग्रस्त है। कभी-कभी सभी प्रकार की दवाएं कर लेने पर भी रोग मिटता नहीं, डॉक्टर भी रोग को पहचान नहीं पाते हैं। ऐसी स्थिति में भगवान का नाम-जप ही वह रसायन (औषधि) है जो मनुष्य के शारीरिक व मानसिक रोगों का नाश कर काया को कंचन की तरह बना देता है। जैसे भगवान में अनन्त चमत्कार हैं, अनन्त शक्तियां हैं; वैसे ही अनन्त शक्तियों से भरे उनके नाम जादू की पिटारी हैं जो लौकिक रोगों की तो बात ही क्या, भयंकर भवरोग को भी मिटा देते हैं। भगवान धन्वन्तरि समुद्र-मंथन से प्रकट हुए। उन्होंने देवताओं व ऋषियों को औषधि, रोग-निदान और उपचार आदि के बारे में बताया। सभी रोगों पर समान और सफल रूप से कार्य करने वाली महौषधि (सबसे बड़ी दवा) के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा– अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारण भेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।। अर्थात्–‘अच्युत, अनन्त, गोविन्द–इन नामों के उच्चारणरूपी औषधि से समस्त रोग दूर हो जाते हैं,...

વૈકુંઠ ચતુર્દશી sbvlog

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હર મહાદેવ જયભગવાન જય શ્રી કૃષ્ણ  वैकुंठ चतुर्दशी  उपवासं दिवा कुर्यात्सायंकाले तवा(शिवा)र्चनम् ॥ पश्चान्ममा(विष्ण्व)र्चनं कार्यमन्यथा निष्फलं भवेत् ॥१॥  ग्राह्या तु हरिपूजायां रात्रिव्याप्ता चतुर्दशी अरुणोदय-वेळायां शिवपूजां समाचरेत् ॥२॥तस्मात्सर्वप्रयत्नेन पूज्या हरिहरावुभौ । प्राप्त कलियुगे घोरे शौचाचारविवर्जिते ॥३॥सहस्रकमलैः कृष्णः कृतवान् शिवपूजनम् । एकन्यूने नेत्रपद्म समर्याप्तं सुदर्शनम् ॥४॥ मनुष्य को दिन में उपवास करना चाहिए और सायंकाल में आपकी (शिव की) पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात मेरी (विष्णु की) पूजा करनी चाहिए, अन्यथा वह व्यर्थ होगी।  रात्रि को व्याप्त (निशीथ कालीन)  चतुर्दशी के दिन हरि की पूजा के लिए स्वीकार्य है। अरुणोदय के समय (सूर्योदय से ७२ मिनट पहले) भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इसलिए हरि और हर दोनों की पूजा पूरे प्रयास से करनी चाहिए।  हम इस घोर कलियुग में पहुँच गए हैं, जो पवित्रता और नैतिकता से रहित है। कृष्ण ने एक हजार कमलों से भगवान शिव की पूजा की। एक कमल कम होने के कारण भगवान ने अपना नेत्र कमल अर्पित कर दिया जिससे सुदर्शन चक्र की प्राप्त...

daily પંચાંગ dt ૦૪/૧૦/૨૫

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‎ Follow the Shastriji Official channel on WhatsApp:   https://whatsapp.com/channel/0029VaA1O7JA2pLLYLxTLf1j હર મહાદેવ આજનું પંચાંગ  તારીખ ૦૪-૧૦-૨૦૨૫ શનિવાર  જય ભગવાન જય શ્રી કૃષ્ણ  ‎*🌞 🚩 । l ॐ l ।  🚩 🌞* 🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉   *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*    🌐 *आज का पंचांग* 🌐  ⛳ *तिथि*……( १२ ) द्वादशी ⛳️ 🙏 शनिप्रदोष 🙏 🌼 पंचक 🌼 0️⃣4️⃣-1️⃣0️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣ 🔔 *वार*……..शनिवार 🔔 🦚 *नक्षत्र*…..धनिष्ठा 🦚 🪔 *योग*……..शूल 🪔 ✳️*करण*…….कौलव ✳️ 🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३३ 🌅 🌌 *सूर्यास्त*  :-०६ः२३ 🌌 🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓 🌝 *चन्द्र राशि*….कुम्भ 🌝 ⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️ 🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀 🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷 🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻 🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎 ⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️ 🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः०९ से १२ः४८ तक 🪻 🌚 राहुकाल …..प्रातः ०९ः३१ से १०ः५८ तक 🌚 💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐 🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏 અમારી whatsup ચેનલ માં જોડાવા આ લિન્ક પર ક્લિક કરો  ‎Follow the Shastriji Official channel ...

Aajnu panchang

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હર મહાદેવ આજનું પંચાંગ  તારીખ 3!10!2025 *🌞 🚩 । l ॐ l । 🚩 🌞* 🕉 ।। *श्री गणेशाय नमः* ।। 🕉  *सुप्रभातम् स्नेह वंदनम्*   🌐 *आज का पंचांग* 🌐  ⛳ *तिथि*……( ११ ) एकादशी ⛳️ 🙏 पाशांकुशा एकादशी ( टेटी - ख़रबूज़ा ) 🙏 💐 भरत मिलाप 💐 🌸 भद्रा प्रातः ०६ः५९ से सायं ०६ः३४ तक 🌸 🌼 पंचक प्रारंभ रात्रि ०९ः२८ से 🌼 0️⃣3️⃣-1️⃣0️⃣-2⃣0⃣2️⃣5️⃣ 🔔 *वार*……..शुक्रवार 🔔 🦚 *नक्षत्र*…..श्रवण 🦚 🪔 *योग*……..धृति 🪔 ✳️*करण*…….वणिज ✳️ 🌅 *सूर्योदय* :-०६ः३२ 🌅 🌌 *सूर्यास्त* :-०६ः२४ 🌌 🌓 *पक्ष*....………शुक्ल 🌓 🌝 *चन्द्र राशि*….मकर / रात्रि ०९ः२८ से कुम्भ 🌝 ⏺️ *ऋतु*.......…..शरद ⏺️ 🍀 *अयन*………दक्षिण 🍀 🪷 *मास*.……….आश्विन 🪷 🌻*कलियुगाब्द*….५१२७🌻 🌎 *विक्रम संवत्*.....२०८१ 🌎 ⭐️ *शक संवत्*...... १९४७ ⭐️ 🪻अभिजीत …..मध्याह्न १२ः०८ से १२ः२६ तक 🪻 🌚 राहुकाल …..प्रातः १०ः५९ से १२ः२७ तक 🌚 💐*।। आपका दिन मंगलमय हो ।।* 💐 🌺🌺 कल ०४-१०-२५ शनिवार 🌺🌺   🙏 शनिप्रदोष 🙏    🌄શાસ્ત્રીજી ભાવનગર 🌄  🙏 🌹 *जय श्री कृष्ण* 🌹🙏