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ભગવાન શિવ ના અવતારો.

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भगवान शिव के 14 अवतार  🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 शिव महापुराण में भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, लेकिन बहुत ही कम लोग इन अवतारों के बारे में जानते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के 19 अवतार हुए थे। आइए जानें शिव के 19 अवतारों के बारे में। 1- वीरभद्र अवतार 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 भगवान शिव का यह अवतार तब हुआ था, जब दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग किया था। जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए। शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया। 2- पिप्पलाद अवतार 🔸🔸🔹🔹🔸🔸 मानव जीवन में भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार का बड़ा महत्व है। शनि पीड़ा का निवारण पिप्पलाद की कृपा से ही संभव हो सका। कथा है कि पिप्पलाद ने देवताओं से पूछा- क्या कारण है कि मेरे पिता दधीचि जन्म से पूर्व ही मुझे छोड़कर चले गए? देवताओं ने बताया शनिग्रह की दृष्टि के कारण ही ऐसा कुयोग बना। पिप्पलाद यह सुनकर बड़े क्...

અમાવસ્યા ભોજન

*अमावास्यां नरा ये तु परान्नमुपभुञ्जते ।*  *तेषां मासकृतं पुण्यमन्नदातुः प्रदाप्यते ।।*  *षण्मासमयने भुङ्क्ते त्रीन्मासान् विषुवे स्मृतम् ।*  *वर्षैर्द्वादशभिश्चैव यत्पुण्यं समुपार्जितम्।।*  *तत सर्वं विलयं याति भुक्त्वा सूर्येन्दुसम्प्लवे ।*       _स्कन्दपुराण, प्रभासखण्ड २००/११-१३_ "जो मनुष्य *अमावस्या* को दूसरे का अन्न खाता है, उसका *महीने भर का* किया हुआ पुण्य अन्नदाता को मिल जाता है। इसी प्रकार *अयनारम्भ* के दिन दूसरे का अन्न खाये तो *छः महीनों* का और *विषुवकाल* (जब सूर्य मेष अथवा तुला राशिपर आये) में दूसरे का अन्न खाने से *तीन महीनों* का पुण्य चला जाता है। *चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण* के अवसर पर दूसरे का अन्न खाये तो *बारह वर्षों से एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो* जाता है। *संक्रान्ति के दिन* दूसरे का अन्न खाने से *महीने भर से अधिक* समय का पुण्य चला जाता है।" 🌳

માનવ શરીર નો સંરચના.

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क्या आप इस शरीर के रहस्य को वैदिक रूपसे जानते है?  यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | भगवान् सूर्य बोले – वत्स कमठ ! तुम्हारी बुद्धि तो वृद्धों जैसी है | तुम बहुत अच्छा प्रतिपादन कर रहे हो | अब मैं तुमसे शरीर का लक्षण सुनना चाहता हूँ; उसे बताओ | कमठ ने कहा – विप्रवर ! जैसा यह ब्रह्माण्ड है, वैसा ही यह शरीर भी बताया गया है | पैरों का मूल (तलवा) पातळ है, पैरों का उपरी भाग रसातल है, दोनों गुल्फ तलातल हैं, दोनों पिंडलियों को महातल कहा गया है, दोनों घुटने सुतल, दोनों ऊरू ( जांघ) तथा कटिभाग अतललोक है | नाभि को भूलोक, उदार को भुवर्लोक, वक्षःस्थल को स्वर्गलोक, ग्रीवा को महर्लोक और मुख को जनलोक कहते हैं | दोनों नेत्र तपोलोक है तथा मस्तक को सत्यलोक कहा गया है | जैसे पृथ्वी पर सात द्वीप स्थित हैं, उसी प्रकार इस शरीर में सात धातुएं हैं, उनके नाम सुनिए – त्वचा, रक्त, मांस, मेदा, हड्डी, मज्जा और वीर्य – ये सात धातुएं हैं | शरीर में तीन सौ साठ हड्डियाँ हैं तथा तीस लाख छप्पन हजार नौ नाड़ियाँ बतायी गयी हैं | जैसे नदियाँ इस पृथ्वी पर जल बहाती हैं, उसी प्...

South Sea Pearl

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South Sea Pearl  मोती  रत्न जन्मपत्री ग्रह अनुसार लाभ हानि         सादगी, पवित्रता और कोमलता की निशानी माने जाने वाला मोती एक चमत्कारी ज्योतिषीय रत्न माना जाता है। इसे मुक्ता, शीशा रत्न और पर्ल (Pearl) के नाम से भी जाना जाता है। मोती सिर्फ एक रंग का ही नहीं होता बल्कि यह कई अन्य रंगों जैसे गुलाबी, लाल, हल्के पीले रंग का भी पाया जाता है। मोती, समुद्र के भीतर स्थित घोंघे नामक कीट में पाए जाते  मोती के तथ्य (Facts of Moti or Pearl in Hindi) * मोती के बारे में बताया जाता है कि यह रत्न, बाकी रत्नों से कम समय तक ही चलता है क्योंकि यह रत्न रूखेपन, नमी तथा एसिड से अधिक प्रभावित हो जाता है। * प्राचीनकाल में मोती (Pearl or Moti) को सुंदरता निखारने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था तथा इसे शुद्धता का प्रतीक माना जाता था। मोती के लिए राशि (Moti for Cancer Rashi)कर्क राशि के जातकों के लिए मोती धारण करना अत्याधिक लाभकारी माना जाता है । चन्द्रमा से जनित बीमारियों और पीड़ा की शांति के लिए मोती धारण करना लाभदायक माना जाता है। मोती के फायदे (Benefits of P...

what is bhadra

What's is bhadra (vishti) Bhadra is considered bad for most auspicious activities hence it is excluded more god mugurut timing. મોટાભાગના શુભ કાર્યો માટે ભદ્રાને અશુભ માનવામાં આવે છે તેથી તે વધુ સારા મુહૂર્ત સમયને બાકાત રાખવામાં આવે છે. अशुभ माना जाता है? * जानिए भद्रा की शुभता एवं अशुभता एवं महत्व    किसी भी मांगलिक कार्य में भद्रा योग का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि भद्रा काल में मंगल-उत्सव की शुरुआत या समाप्ति अशुभ मानी जाती है अत: भद्रा काल की अशुभता को मानकर कोई भी आस्थावान व्यक्ति शुभ कार्य नहीं करता। इसलिए जानते हैं कि आखिर क्या होती है भद्रा? और क्यों इसे अशुभ माना जाता है?   पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और राजा शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी कड़क बताया गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचांग के एक प्रमुख अंग विष्टि करण में स्थान दिया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया किंतु भद्रा काल में तंत्र कार्य, अदालती और राजनीतिक चुनाव का...

history of Maharana pratap singh

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"महाराणा प्रताप के आदर्श थे उनके पितामह राणा सांगा" प्रताप को बाल्यकाल में सदा यही बात खटकती रहती थी कि भारतभूमि विदेशियों की दासता की हथकड़ी और बेड़ी में सिसक रही है । वे स्वदेश की मुक्ति-योजना में सदा चिन्तनशील रहते थे ।  प्रताप बड़े साहसी बालक थे। स्वतन्त्रता और वीरता के भाव उनके रग-रग में भरे हुए थे। कभी-कभी बालक प्रताप घोड़े की पीठ से उतरकर बड़ी श्रद्धा और आदर से महाराणा कुम्भा के विजयस्तम्भ की परिक्रमा कर तथा मेवाड़ की पवित्र धूलि मस्तक पर लगाकर कहा करते थे कि "मैंने वीर क्षत्राणी का दुग्ध पान किया है, मेरे रक्त में महाराणा साँगा का ओज प्रवाहित है। हे चित्तौड़ के विजय स्तम्भ ! मैं तुमसे स्वतन्त्रता और मातृ-भूमि-भक्ति की शपथ लेकर कहता हूँ, विश्वास दिलाता हूँ कि तुम सदा उन्नत और सिसौदिया-गौरवके विजय प्रतीक बने रहोगे। शत्रु तुम्हें अपने स्पर्शसे मेरे रहते अपवित्र नहीं कर सकते।" बालक प्रतापके सामने सदा राणा साँगाका आदर्श रहता था । वे प्रायः श्रद्धाञ्जलि समर्पित करते समय कहा करते थे कि 'मैं महाराणा साँगाके अधूरे कार्यको अवश्य पूरा करूंगा । उनके दिल्ली- विजय स्व...

पा शांकुशा एकादशी।। ekadashi

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બ્રહ્માંડ પુરાણમાં યુધિષ્ઠિરને શ્રીકૃષ્ણે પાસાંકુશા એકાદશીનું માહાત્મ્ય કહ્યું છે, જે આ વ્રત કરે છે તે આવા ફળ મેળવે છે. “પાસાંકુશા એકાદશી” પાસાંકુશા / પાશાંકુશા અથવા પાપાંકુશા એકાદશી આસો માસમાં શુકલ પક્ષમાં આવે છે. તેનું માહાભ્ય બ્રહ્મ વૈવર્ત પુરાણમાં ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ અને મહારાજ યુધિષ્ઠિર વચ્ચેની વાતચીતમાં વર્ણવાયું છે. આ વર્ષે આ એકાદશી 6 ઓક્ટોબર 2022 ના રોજ છે. યુધિષ્ઠિરે શ્રીકૃષ્ણને પૂછયું, ‘હે મધુસુદન, આસો માસના શુકલ પક્ષમાં આવતી એકાદશીનું નામ, મહત્ત્વ, વિધિ અને ફળ વિશે મને કહો.’ ભગવાન શ્રીકૃષ્ણે કહ્યું, ‘હે રાજન, આ એકાદશીનું નામ પાસાંકુશા અથવા પાપાંકુશા એકાદશી છે. આ એકાદશીનું માહાભ્ય સાંભળવાથી બધા પાપ નાશ પામે છે. આ એકાદશીએ દરેકે પદ્મનાથની પૂજા કરવી જોઈએ. આ એકાદશી મોક્ષ આપે છે, સ્વર્ગનું તમામ સુખ અને ઈચ્છિત ફળનું પ્રદાન કરે છે. વિષ્ણુનું સંકીર્તન કરવા માત્રથી જ પૃથ્વી પરના બધા પવિત્ર સ્થળોની યાત્રા કરવાથી જે પુણ્ય મળે તેટલું પુણ્ય મળે છે. પાપાચારી પ્રવૃત્તિઓ કરવા છતાં પણ જો માનવી વિષ્ણુ ભગવાનના શરણે જાય તો પાપમાંથી છુટકારો મળે છે. જે વૈષ્ણવો ભગવાન શિવની નિંદા...