ગોપી ચંદન નો મહિમા.
गोपी-चंदन की महिमा •••••••••••••••••••••• जहाँ गोपयों ने निवास किया था, उस निवास के कारण ही वह स्थान ‘गोपीभूमि’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।वहाँ गोपियों अंगराग से उत्पन्न उत्तम गोपीचन्दन उपलब्ध होता है। जो अपने अंगों में गोपीचन्दन लगाता है, उसे गंगा स्नान का फल मिलता है। जो सदा गोपीचन्दन की मुद्राओं से मुद्रित होता है, अर्थात गोपीचन्दन का छापा तिलक लगाता है, उसे प्रतिदिन महानदियों में स्नान करने का पुण्यफल प्राप्त होता है। जिसने सहस्त्र अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ कर लिये। सब तीर्थों का सेवन, वह नित्य गोपीचन्दन लगाने मात्र से कृतार्थ हो जाता है, उससे भी दस गुना पुण्य पंचवटी की रज का है, उसकी अपेक्षा भी सौगुना पुण्य गोपीचन्दन रज का है। गोपीचन्दन को तुम वृन्दावन की रज के समान समझे। जिसके शरीर में गोपीचन्दन लगा हो, वह सैकड़ों पापों से युक्त हो तो भी उसे यमराज भी अपने साथ नहीं ले जा सकते, फिर यमदूतों की तो बात ही क्या है। पापी होने पर भी जो पुरुष प्रतिदिन गोपीचन्दन का तिलक धारण करता है, वह श्रीहरि के गोलोकधाम में जाता है, जहाँ प्राकृत गुणों का...