|| जानियें, मोर-पंख से कैसे पायें - सुख-समृद्धि और शांति || ====================================== सनातन धर्म में मोर-पंख का विशेष महत्तव है। मोर-पंख का संबंध केवल श्रीकृष्ण से नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं से भी है। मोर सरस्वती देवी का भी वाहन है यही मोर भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय का वाहन भी है। नेपाल आदि देशों में मोर को ब्रम्हा की सवारी के रूप में माना जाता है यहाँ तक कि जापान, इंडोनेसिया थाईलैंड और अन्य देशों में भी मोर पूज्य है। जन सामान्य में मोर-पंख को लेकर यह विश्वास है कि मोर-पंख के प्रयोग से अमंगल टल जाता है। वास्तु एवं ज्योतिष के क्षेत्र में मोर-पंख का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है। मोर-पंख घर में रखना मंगलकारी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है। ऐसा क्यों होता है इसकी कथा हमारे धर्म ग्रंथों में इस प्रकार प्राप्त होती है - प्राचीन काल में संध्या नाम का एक असुर हुआ था। यह बहुत शक्तिशाली और तपस्वी असुर था। गुरु शुकाचार्य के कारण संध्या देवताओं का शत्रु बन गया था। संध्या असुर ने कठोर तप द्वारा शिवजी और ब्रह्म...
🌷देवोत्थान एकादशी ।🌷 कार्तिक मास में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी दीपावली के बाद आती है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन उठते हैं, इसीलिए इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में 4 माह शयन के बाद जागते हैं। भगवान विष्णु के शयनकाल के चार मास में विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं, इसीलिए देवोत्थान एकादशी पर भगवान हरि के जागने के बाद शुभ तथा मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। देवोत्थान एकादशी व्रत और पूजा विधि प्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और उनसे जागने का आह्वान किया जाता है। इस दिन होने वाले धार्मिक कर्म इस प्रकार हैं- तुलसी विवाह का आयोजन देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। तुलसी के वृक्ष और शालिग्राम की यह शादी सामान्य विवाह की तरह पूरे धूमधाम से की जाती है। चूंकि तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहते हैं इसलिए देवता जब जागते हैं, त...
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