काशी महिमा
હર મહાદેવ
काशीविश्वनाथ
#काशी_में_निवास_करने_के_नियम
काशी (वाराणसी) में निवास करने वाले साधक अथवा गृहस्थ के लिए शास्त्रसम्मत नियम क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत हैं। ये नियम स्कन्दपुराण (काशीखण्ड), धर्मशास्त्र और परंपरागत आचार से निःसृत हैं—
1. #काशी_निवास_का_संकल्प (आवश्यक)
काशी में रहने से पूर्व यह भाव दृढ़ हो— मैं काशी को भोगभूमि नहीं, साधना-भूमि मानकर निवास कर रहा/रही हूँ। #नियम-- काशी में निवास को पर्यटन न बनाएं। “यह मेरा नगर नहीं, मैं इस नगर का हूँ”— यह भाव रखें।
2. #प्रातःकालीन_नियम--
गंगा काशी की जीवन-रेखा हैं। #नियम- ब्रह्ममुहूर्त में उठना अत्यंत वांछनीय है। गंगा-दर्शन या गंगा-स्मरण अवश्य करें। स्नान के बाद मौन या जप कम से कम 108 बार अवश्य करें। #शास्त्रीय_भाव-- गङ्गादर्शनमात्रेण पापक्षयो भवेत्
3. #काशी_विश्वनाथ_स्मरण--
काशी विश्वनाथ काशी के हृदय हैं। #नियम- प्रतिदिन कम से कम मानसिक दर्शन। सोमवार या प्रदोष में विशेष स्मरण। अहंकार, प्रदर्शन और दिखावे से दूर रहना। यह माना जाता है कि काशी में निवास करना मतलब समझना चाहिए कि नित्यनिरंतर शिव का सान्निध्य मिल रहा है।
4. #कालभैरव_की_आज्ञा_में_रहना (अत्यंत महत्वपूर्ण)
कालभैरव मंदिर काशी के कोतवाल हैं। #नियम- काशी में रहकर भैरव का अनादर वर्जित है। मद, अहंकार, अन्याय, छल—इनसे दूर रहें। काशी में प्रवेश और निवास भैरव-स्मरण से शुद्ध माना गया है। #शास्त्रीय_उक्ति—
भैरवाज्ञाविना काशी न वसति जनः कदाचन।
5. #आचार_शुद्धि_के_नियम--
काशी में आचरण ही साधना है। #नियम- असत्य, निंदा, छल, क्रोध से विशेष बचाव अतिभोजन, विलास और दिखावा त्याज्य, सरल वस्त्र, शुद्ध भाषा, संयमित व्यवहार यहाँ सामान्य पाप भी तीव्र फल देते हैं—यह शास्त्रीय चेतावनी है।
6. #श्मशान_संबंधी_मर्यादा
(मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र श्मशान)-- ये भय के नहीं, वैराग्य के गुरु हैं। #नियम- श्मशान का उपहास या असम्मान न करें। वहाँ मौन और गंभीर भाव रखें,
मृत्यु-दर्शन को जीवन-बोध बनाएं, तमाशा नहीं। सुनसान स्थान को श्मशान कहते हैं। आजकल लोग वीडियोग्राफी दिखा दिखा कर श्मशान घाटों पर भीड़ मचा दिए हैं। इससे बचना चाहिए।
7. #दान_और_सेवा_का_नियम --
काशी में दान को मौन होकर और पात्र देखकर करें। #नियम- अन्नदान, जलदान, वस्त्रदान श्रेष्ठ हैं। दिखावे का दान निष्फल कहा गया है। साधु, ब्राह्मण, अतिथि—इनका सम्मान अनिवार्यरूप से करें।
8. #काशी_में_वर्जित_आचरण--
#निषेध-- काशी में रहकर घोर तामसिक जीवन न जीएं। नशा, हिंसा, अनैतिक व्यापार, धर्म का उपहास या अपमान न करें। शास्त्र कहते हैं— काशी पवित्र करती है, परंतु अहंकारी को शीघ्र दंडित भी करती है।
9. #काशी_निवासी_का_अन्तःभाव--
सच्चा काशी-निवासी— मृत्यु से नहीं डरता है। जीवन को क्षणभंगुर जानता है और हर दिन को तैयारी मानता है, क्योंकि— काश्यां जीवन्मुक्तिः सम्भवति।
#निष्कर्ष-- काशी में निवास नियमों का बंधन नहीं, चेतना का अनुशासन है।
-- राजेश्वराचार्यः संस्कृतम् वाराणसी/दिल्ली




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