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हनुमान तांडव | sbstotram ।

હર મહાદેવ જય શ્રી કૃષ્ણ  जय श्री हनुमान  *श्री हनुमत तांडव स्तोत्र* 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ *हनुमत तांडव स्तोत्र का नित्य पाठ अत्यंत लाभकारी है । इसके प्रतिदिन पाठ से श्री हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है साथ ही मंगल, राहु आदि ग्रहों के कष्टों से भी छुटकारा मिलता है। इसके नित्यपाठ करने से भूत प्रेत, रोग , दुर्घटना आदि का भय नहीं भी नहीं रहता और सर्वत्र सुरक्षा होती है।* *॥ श्रीहनुमत्ताण्डवस्तोत्रम् ॥* *वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् । रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम्॥* *भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं, दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् ।* *सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं, समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥ १॥* *सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितं वचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ।* *इति प्लवङ्गनाथभाषितं निशम्य वानराऽधिनाथ आप शं तदा, स रामदूत आश्रयः ॥ २॥* *सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना, भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।* *कृतौ हि कोसलाधिपौ, कपीशराजसन्निधौ, विदहजेशलक्ष्मणौ, स मे शिवं करोत्वरम् ॥ ३॥* *सुशब्दशास्त्रपारगं, विलोक्य रामचन्द्रमा...

भगवान विष्णु के तीन नाम, करते हैं रोगों का नाश!*

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હર મહાદેવ *भगवान विष्णु के तीन नाम, करते हैं रोगों का नाश!* सभी रसायन हम करी नहीं नाम सम कोय। रंचक घट मैं संचरै, सब तन कंचन होय।। सारा संसार आधिदैविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक रोगों से ग्रस्त है। कभी-कभी सभी प्रकार की दवाएं कर लेने पर भी रोग मिटता नहीं, डॉक्टर भी रोग को पहचान नहीं पाते हैं। ऐसी स्थिति में भगवान का नाम-जप ही वह रसायन (औषधि) है जो मनुष्य के शारीरिक व मानसिक रोगों का नाश कर काया को कंचन की तरह बना देता है। जैसे भगवान में अनन्त चमत्कार हैं, अनन्त शक्तियां हैं; वैसे ही अनन्त शक्तियों से भरे उनके नाम जादू की पिटारी हैं जो लौकिक रोगों की तो बात ही क्या, भयंकर भवरोग को भी मिटा देते हैं। भगवान धन्वन्तरि समुद्र-मंथन से प्रकट हुए। उन्होंने देवताओं व ऋषियों को औषधि, रोग-निदान और उपचार आदि के बारे में बताया। सभी रोगों पर समान और सफल रूप से कार्य करने वाली महौषधि (सबसे बड़ी दवा) के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा– अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारण भेषजात्। नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।। अर्थात्–‘अच्युत, अनन्त, गोविन्द–इन नामों के उच्चारणरूपी औषधि से समस्त रोग दूर हो जाते हैं,...

વૈકુંઠ ચતુર્દશી sbvlog

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હર મહાદેવ જયભગવાન જય શ્રી કૃષ્ણ  वैकुंठ चतुर्दशी  उपवासं दिवा कुर्यात्सायंकाले तवा(शिवा)र्चनम् ॥ पश्चान्ममा(विष्ण्व)र्चनं कार्यमन्यथा निष्फलं भवेत् ॥१॥  ग्राह्या तु हरिपूजायां रात्रिव्याप्ता चतुर्दशी अरुणोदय-वेळायां शिवपूजां समाचरेत् ॥२॥तस्मात्सर्वप्रयत्नेन पूज्या हरिहरावुभौ । प्राप्त कलियुगे घोरे शौचाचारविवर्जिते ॥३॥सहस्रकमलैः कृष्णः कृतवान् शिवपूजनम् । एकन्यूने नेत्रपद्म समर्याप्तं सुदर्शनम् ॥४॥ मनुष्य को दिन में उपवास करना चाहिए और सायंकाल में आपकी (शिव की) पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात मेरी (विष्णु की) पूजा करनी चाहिए, अन्यथा वह व्यर्थ होगी।  रात्रि को व्याप्त (निशीथ कालीन)  चतुर्दशी के दिन हरि की पूजा के लिए स्वीकार्य है। अरुणोदय के समय (सूर्योदय से ७२ मिनट पहले) भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इसलिए हरि और हर दोनों की पूजा पूरे प्रयास से करनी चाहिए।  हम इस घोर कलियुग में पहुँच गए हैं, जो पवित्रता और नैतिकता से रहित है। कृष्ण ने एक हजार कमलों से भगवान शिव की पूजा की। एक कमल कम होने के कारण भगवान ने अपना नेत्र कमल अर्पित कर दिया जिससे सुदर्शन चक्र की प्राप्त...